August 28: Day 1 of my fast, day 551 of our chain.
Bhagat Singh on his chest, blood on his head and anger in his eyes.
The farmer of the country will not forgive!
And History will not forgive those who showered sticks of capitalists on the farmers of my country..
#farmers #kisanektazindabaad![]()
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#ChainFastingForPeace #FastingAgainstFascism #FreeSanjivBhatt #ResignAmitShah


August 29: Day 2 of my fast, day 552 of our chain.
एक ओर विश्वभ्रमणकारी महान जुमलेबाज चक्कर भर्ती हिन्दू हृदय सम्राट जालियाँवाला बाग में स्मारक का उदघाटन कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर करनाल SDM आयुष सिन्हा जालियाँवाला बाग दोहराने का आदेश देकर गृहयुद्ध के उदघाटन की तैयारी कर रहे थे।
बहुत ही सुनियोजित था सबकुछ और आयुष सिन्हा केवल ऊपर से आए आदेश को ही फारवर्ड कर रहा था अपने अधीनस्थों को। संभवतः इसी बहाने शांति से सबकुछ बर्दाश्त कर रहे किसानों को उकसाकर गृहयुद्ध की नींव रखी गयी है।
संभवतः पुलिस और सेना के जंग खाते हथियारों से सरकार चिंतित है। और पड़ोसी देशों या साम्प्रदायिक जातिवादी आतंकियों पर प्रयोग करके अपने आकाओं को नाराज नहीं करना चाहती, इसलिए भारत को सीरिया, इराक और अफगान बनाने के सपने देख रही है।
स्वाभाविक है कि किसी भी अत्याचार को सहने की एक सीमा होती है और जब सहन शक्ति जवाब दे जाये, तो चूहा भी बिल्ली पर आक्रमण कर देता है। नेवला भी शेरों पर आक्रमण कर देता है….फिर ये तो सरकारी गुलाम हैं जो अपने ही मालिकों का सर फोड़ने निकले थे। कोई मालिक अपने नौकरों की बदमाशी कब तक बर्दाश्त करेगा ?
और परिणाम भी जल्दी ही सामने आ गया। इधर पुलिस ने किसानों का सर तोड़ा, एक किसान की मौत हुई और उधर किसानों ने लठियाँ संभाल ली और भाजपा विधायक को कूट दिया।
सरकारी नौकरों ने यदि खुद को फिरंगी समझ लिया है, तो फिर उन्हें चाहिए कि इतिहास फिर से पढ़ लें कि कैसे खदेड़ा था फिरंगियों को भारत से।
मैं गांधीवादी नहीं हूँ और न ही बुद्धवादी हूँ। किसी भी अत्याचार को सहन करने की एक सीमा होती है और उस सीमा के बाद अत्याचारियों को उनकी औकात बता ही देनी चाहिए। और यही श्रीकृष्ण का सिद्धान्त है और श्रीकृष्ण के सिद्धान्त को किसी भी कायरतापूर्ण सिद्धान्त से अधिक सार्थक मानता हूँ।
विशुद्ध चैतन्य
#ChainFastingForPeace #FastingAgainstFascism #FreeSanjivBhatt #ResignAmitShah


August 30: Day 3 of my fast, day 553 of our chain.
क्यों करे गर्व हिन्दू होने पर?
क्यों करें “जय श्री राम” का उद्घोष?
केवल इसलिए, क्योंकि हिन्दुत्व के ठेकेदारों की बपौती है हिन्दुत्व?
केवल इसलिए, क्योंकि हिन्दुत्व के ठेकेदारों के पिल्ले सड़कों पर लावारिस भटक रहे हैं आतंक मचाने और मोबलिंचिंग करने के लिए?
केवल इसीलिए, क्योंकि हिन्दुत्व के ठेकेदारों की सरकार देश लूट रही है, बेच रही है और तालियाँ बजा रहे हैं हिन्दू?
क्या इन सभी उत्पातों पर गर्व होना चाहिए किसी भी हिन्दू को?
बिलकुल नहीं!
गर्व तभी करिए हिन्दू होने पर, जब सम्पूर्ण हिन्दू समाज इन सभी उत्पातों का विरोधी हो जाये और इन उत्पातियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने लगें।
हिन्दू वही है, जो अधर्म के विरुद्ध है अधर्मियों के विरुद्ध है, देश लूटने और बेचने वालों के विरुद्ध है, साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध है, हिन्दुत्व और श्रीराम के नाम पर आतंक मचाने वालों के विरुद्ध है।
~विशुद्ध चैतन्य
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August 31: Day 4 of my fast, day 554 of our chain.
बिलकुल सही है, ऐसा ही होता है और अपने अनुभवों से जानता हूँ।
उदाहरण के लिए हम संघियों, बजरंगियों, कॉंग्रेसियों, भाजपाइयों को ही ले लेते हैं। वे गर्व से कहते हैं कि वे संघी हैं, बजरंगी हैं, कॉंग्रेसी हैं, भाजपाई हैं……इसलिए वे वही बन जाते हैं, इंसान नहीं बन पाते, देशभक्त नहीं बन पाते।
आप उन्हें भी उदाहरण के लिए ले सकते हैं, जो गर्व से कहते हैं “मैं मुसलमान हूँ, “मैं हिन्दू हूँ”, “मैं मोदीवादी हूँ”, “मैं गोडसेवादी हूँ”, “मैं अंबेडकरवादी हूँ”, “मैं पेरियारवादी हूँ”।
ये सब भी इंसानियत से दूर एक दूसरे की नकल बनते चले जाते हैं। इन सभी गिरोह पर यदि ध्यान दें, तो सभी एक दूसरे की कार्बन कॉपी ही लगेंगे। ये सभी एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए बिलकुल एक जैसी पद्धति का प्रयोग करते हैं। कोई इस्लामिक क्रूरता की निंदा करेगा, तो अपने लोगों की क्रूरता न्यायोचित व धार्मिक कृत्य बताएगा। और ये सभी एक दूसरे की धार्मिक आस्थाओं पर निरंतर चोट करते रहेंगे स्वयं को श्रेष्ठ बताने के लिए। जबकि इनके अपने ही दड़बे के लोगों का भला करने लायक नहीं होते। अपने ही दड़बों के शोषित पीड़ितों की सहायता नहीं कर पाते।
सदैव स्मरण रखें:
जिस दिन आपको गर्व होने लगेगा इंसान होने पर और गर्व से आप कह पाएंगे कि मैं इंसान हूँ, उस दिन इंसानियत आपके भीतर जन्म लेने लगेगी और एक दिन आप इंसान बन जाएंगे।
~ विशुद्ध चैतन्य
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September 1: Day 5 of my fast, day 555 of our chain.
अब तो विश्वास हो गया न कि संघियों और तालिबानियों में कितनी गहरी यारी है ??
इसीलिए सारा गोदीमीडिया अफगानिस्तान में डेरा जमाये बैठा है। अफगानिस्तान की पल पल की रिपोर्ट दे रहा है, लेकिन अपने ही देश के किसानों के लिए इनके पास समय नहीं।
आप पाएंगे कि संघी-बजरंगियों की मानसिकता तालिबानियों से रत्तीभर भी अलग नहीं है। अभी हाल में एक व्यक्ति को ट्रक के पीछे बांधकर तब तक घसीटा गया, जब तक वह मर नहीं गया। ये सब तालिबानियों से ली ट्रेनिंग का ही असर है।
और आपको लगता है कि अमेरिका की पालतू और तालिबानियों की हितैषी मोदी सरकार अपने देश में शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित करेगी ?
ये वही करेगी, जो तालिबानी करते आ रहे हैं आज तक….क्योंकि ये तालिबानियों के जुड़वाँ भाई हैं, जो कुम्भ के मेले में बिछुड़ गए थे।
~ विशुद्ध चैतन्य
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