Dec 26: Day 1 of my fast, day 671 of our chain.
अंबाला में जिस चर्च में ईसा मसीह की मूर्ति तोड़ी गई गयी वो 173 साल पुराना है। 😔😔 शर्मनाक😔
173 साल से किसी को कोई खतरा महसूस नहीं हुआ। लेकिन 7 साल में पागलों की फौज तैयार कर दी जिन्हें 24 घण्टे हिन्दू खतरे में दिखता है…?
हमारे धर्म और मुल्क का क्या हाल कर दिया…!!! 😔😔
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Dec 27: Day 2 of my fast, day 672 of our chain.
अब मुलाक़ात में वो गर्मजोशी न रही,,
लगते वक़्त गले वो ख़ामोशी न रही,,
मतलबी रिश्तों ने छीन ली इंसानियत,,
आज के दौर में वो मोहब्बत न रही,,
यूँ तो हर दौर में होते है राम
बस आज राम के साथ वनवास पर निकलने वाली सीता न रही,,
आपाधापी की दौड़ तो अब भी ज़ारी हैं
थक कर सो जाए वो माँ की अब गोद न रही,,
भगवानो की रक्षा के लिए
अब हो जाते है क़त्ल यहाँ पर
इंसानियत को बचाने वाली अब वो भगवत्ता नहीं रही,,
बच गई है 5 इंच की खिड़की में झांखती निगाहे
आकाश की तरफ़ उठने वाली अब निगाह न रही। ~✍️ Shashank Sakha
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Dec 28: Day 3 of my fast, day 673 of our chain.
एक बार जरूर पढ़ें यह कहानी
एक बार दो बहुमंजिली इमारतों के बीच बंधी हुई एक तार पर लंबा सा बाँस पकड़े एक नट चल रहा था,
उसने अपने कन्धे पर अपना बेटा
बैठा रखा था।
सैंकड़ों, हज़ारों लोग दम साधे देख
रहे थे।
सधे कदमों से, तेज हवा से जूझते हुए अपनी और अपने बेटे की ज़िंदगी दाँव पर लगा उस कलाकार ने दूरी पूरी कर ली
भीड़ आह्लाद से उछल पड़ी, तालियाँ, सीटियाँ बजने लगी ।
लोग उस कलाकार की फोटो खींच रहे थे, उसके साथ सेल्फी ले रहे थे। उससे हाथ मिला रहे थे
और वो कलाकार माइक पर आया, भीड़ को बोला,
क्या आपको विश्वास है कि मैं यह दोबारा भी कर सकता हूँ l
भीड़ चिल्लाई हाँ हाँ, तुम कर सकते हो।
उसने पूछा, क्या आपको विश्वास है, भीड़ चिल्लाई हाँ पूरा विश्वास है,
हम तो शर्त भी लगा सकते हैं कि तुम सफलतापूर्वक इसे दोहरा भी सकते हो।
कलाकार बोला, पूरा पूरा विश्वास है ना l
भीड़ बोली, हाँ l
कलाकार बोला, ठीक है, कोई मुझे अपना बच्चा दे दे, मैं उसे अपने कंधे पर बैठा कर रस्सी पर चलूँगा।
खामोशी, शांति, चुप्पी फैल गयी l
कलाकार बोला, डर गए, अभी तो आपको विश्वास था कि मैं कर सकता हूँ।
इसी तरह दंगे करवाने वाले कभी अपने बच्चों को दंगो में नही भेजते,,
आपको उकसाते है, आपके बच्चों को मरने भेजते हैं।
सोचिए, उनके जोशीले नारो में आकर मरने मत जाइए।
जियो और जीने दो ।।
🙏💐🌹🙏🌹💐🙏
कश्मीरा शाह चतुर्वेदी
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Dec 29: Day 4 of my fast, day 674 of our chain.
🙏🙏🙏
गधे ने बाघ से कहा, ‘घास नीली है।’ बाघ ने कहा, ‘घास हरी है।’
फिर दोनों के बीच चर्चा तेज हो गई। दोनों ही अपने-अपने शब्दों में दृढ़ हैं। इस विवाद को समाप्त करने के लिए, दोनों जंगल के राजा शेर के पास गए।
पशु साम्राज्य के बीच में, सिंहासन पर बैठा एक शेर था। बाघ के कुछ कहने से पहले ही गधा चिल्लाने लगा। “महाराज, घास नीला है ना?” शेर ने कहा, ‘हाँ! घास नीली है। ‘
गधा, ‘ये बाघ नहीं मान रहा। उसे ठीक से सजा दी जाए। ‘राजा ने घोषणा की,’ बाघ को एक साल की जेल होगी। राजा का फैसला गधे ने सुना और वह पूरे जंगल में खुशी से झूम रहा था। बाघ को एक साल की जेल की सजा सुनाई गई। ‘
बाघ शेर के पास गया और पूछा, ‘क्यों महाराज! घास हरी है, क्या यह सही नहीं है? ‘शेर ने कहा,’ हाँ! घास हरी है। ‘बाघ ने कहा,’ … तो मुझे जेल की सजा क्यों दी गई है? ‘
सिंह ने कहा, “आपको घास नीले या हरे रंग के लिए सजा नहीं मिली। आपको उस मूर्ख गधे के साथ बहस करने के लिए दंडित किया गया है। आप जैसे बहादुर और बुद्धिमान जीव ने गधे से बहस की और निर्णय लेने के लिए मेरे पास आये।”
कहानी का सार …. ….
2022 में अपना वोट सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार को दें …. बस गधों से बहस न करें अन्यथा आपको अगले 5 साल तक की सजा हो जाएगी।
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Dec 30: TBA
