Amit Dhawan, Nov 26 – Nov 30, 2021

Nov 26: TBA

Nov 27: Day 2 of my fast, day 642 of our chain.
कोई भी मीडिया समूह आपको यह बात नही बता रहा है कि कि नरेंद्र मोदी की सरकार नवम्बर के अंत मे अपने ढाई साल पूरे करने जा रही है यानी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने पूरे साढ़े सात साल पूरे हो गए हैं, नरेंद्र मोदी ने 30 मई, 2019 को प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ग्रहण की थी 30 नवम्बर 2021 को उनकी दूसरी टर्म के ढाई साल पूरे हो गए हैं…….

क्या इस अवसर पर एक व्यापक बहस नही चलना चाहिए ?

जी हां पूरे साढ़े सात साल !…….

ओर साढ़े सात साल में मोदी जी ने क्या किया !…..कुछ भी नही !….. बल्कि जो था उसे और बर्बाद कर दिया,

दरअसल यही वो बात है जिस पर मुख्य मीडिया बहस से बचना चाहता है क्योकि बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी !उन सारी घोषणाओं ओर योजनाओं पर चर्चा करना पड़ेगी जिनके बारे में 2014-15 में बड़ी बड़ी बाते की गई थी

अगर आप अंधभक्त भी है तो भी एक बार दिल पर हाथ रखकर बताइए कि…….

क्या हर साल दो करोड़ लोगो को रोजगार मिला ?
(इस सरकार के आंकड़े ही यह नही बता रहे हैं कि बेरोजगारी की दर पिछले 45 साल में सबसे अधिक है ! )

क्या विदेशों में जमा काला धन वापस आया ? काले धन पर बनने वाली टास्क फोर्स का क्या हुआ

महंगाई पर कितनी लगाम लगीं ?
( याद कीजिए मुख्य नारा ही यह था कि ‘बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार’)

100 स्मार्ट सिटी बनने वाले थे !…कितने स्मार्ट सिटी बने ?

नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा कितनी साफ हुई ?

मोदी सरकार में कितने एम्स नए बने !…….

गोकुल ग्राम योजना का क्या हुआ ?

क्या किसानों की आय दुगुनी हुई ?

स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया योजना का क्या हुआ ?

मेक इन इंडिया के तहत साढ़े सात सालों में कितने नए कारखाने लगे

अगर व्यापक बहस हुई तो ऐसे बहुत से सवाल आएंगे जिसके बारे में बताने के लिए भाजपा प्रवक्ताओं के लिए कुछ भी नही होगा,

अभी कुछ दिन पहले दुनिया की सबसे बड़ी कंसल्टेंट फर्मों में एक मैकेंजी ने एक रिपोर्ट पेश की है इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि इसमे दुनिया के विभिन्न देशों की सन 2000 के बाद बढ़ने वाली संपत्ति की तुलना की है आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस रिपोर्ट में टॉप टेन कंट्री में भारत का नामोनिशान भी नही है मैकेंजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले 20 सालों में चीन की संपत्ति में भी बेतहाशा इजाफा हुआ है. चीन की वेल्थ यानि संपत्ति वर्ष 2000 के 07 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 120 ट्रिलियन डॉलर हो गई है. चीन की दौलत अमेरिका से भी तीन गुना रफ्तार से बढ़ी है

यदि मोदी सरकार भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बताती है तो इस लिस्ट में भारत क्यो नही है ?

अब एक बात और समझ लीजिए 1999 में अटल बिहारी की सरकार थी उसके बाद मनमोहन सरकार का कार्यकाल 2004 से 2014 तक था, उसके बाद मोदी सरकार आयी जिसे अब साढ़े सात साल पूरे हो रहे हैं

यानी 1999 के बाद भाजपा ने कुल साढ़े बारह साल देश का नेतृत्व किया जबकि कांग्रेस ने कुल 10 साल !….. आगे आप खुद ही समझदार हैं ……

देश को अभी ढाई साल ओर झेलना है !…उम्मीद तो वैसे इनसे कुछ भी नहीं है, लेकिन यह तय है कि इन ढाई सालो में यह सब कुछ अडानी अम्बानी के हवाले कर खुद झोला उठाकर निकल लेंगे !…..✍️ Girish Malviya Sir

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Nov 28:

Day 3 of my fast, day 643 of our chain.

पेपर और डिजिटल करेंसी धन नहीं, भ्रम है।

प्राचीन काल में जब लोग अँग्रेजी नहीं जानते थे, डिग्रियाँ, डिप्लोमा का चलन नहीं था, तब धान ही धन हुआ करता था। वास्तव में धन शब्द धान से ही आया है।

लगान में किसान धान दिया करते थे। विवाह आदि उत्सवों में भी धान की बालियाँ और धान का ही महत्व हुआ करता था। गृह प्रवेश के समय लोटे में धान भर कर कन्या से कहा जाता था कि लोटे को अपने पैसे से घर के भीतर की तरफ पलट दो। अर्थात धान घर के भीतर आना चाहिए।

इसका अर्थ होता था कि नववधू धन का सदुपयोग करेगी, ताकि घर सुखी व समृद्ध बने, धन-धान्य से भरपूर रहे।

प्राचीन काल में लोग विपदाकाल के लिए धन संग्रह करके रखते थे, लेकिन डिजिटल करेंसी में यह असंभव हो जाएगा। सरकार आपके धन पर पूरी नजर रखेगी और जब चाहे आपके धन का अधिग्रहण कर लेगी, आप कुछ नहीं कर पाएंगे। जैसे बैंक को दिवालिया घोषित करके आपके द्वारा जमा सारे रुपए सरकार हजम कर जाती है और आँसू पोंछने के लिए लाख रुपए पकड़ा देती है।

चाणक्य के शिष्य से धनानन्द ने प्रश्न पूछा: “धन की रक्षा किन लोगों से करनी चाहिए ?”

शिष्य ने उत्तर दिया: “चोरों, राजा और राज्याधिकारियों से।”

क्योंकि जनता के धन पर बुरी नजर या तो चोर रखता है, या फिर राजा (शासक)। और राजा के अधिकारी राजा को बताते रहते हैं कि किस के पास कितना धन है, ताकि राजा धनवान को डरा धमका कर धन वसूल सके।

आज भी यही प्रथा है, केवल तरीका बदल गया है। अब तो पार्टी की सदस्यता स्वीकारो, पार्टी फंड के नाम पर मोटा चढ़ावा चढ़ाओ, अन्यथा इन्कम टैक्स और सीबीआई की रेड झेलो।

और ऐसी स्थिति में डिजिटल करेंसी, अर्थात अपनी तिजोरी लुटेरों, माफियाओं के हवाले करके यह समझना कि आपका धन सुरक्षित है, सिवाय मूर्खता के और कुछ नहीं।

✍️~ विशुद्ध चैतन्य

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Nov 29: Day 4 of my fast, day 644 of our chain.

अम्बानी का लंदन में मकान खरीदना और रिलायंस कैपिटल का डिफॉल्टर हो जाना।

जब तक देश की 99% अवाम धर्म, जाति और पाखंड में डूबी रहेगी, उसे बेरहमी से लूटा जाएगा।

आज रिज़र्व बैंक ने रिलायंस कैपिटल का टेक ओवर कर लिया है।

वाट्सअप में डूबे रहिए। देश लुटता रहेगा। ✍️ Soumitra Roy Sir

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Nov 30: Day 5 of my fast, day 645 of our chain.

संसद सत्र चल रहा है। सरकार सवालों के जवाब दे रही है, लेकिन पेडिग्री मीडिया को इसमें ज़्यादा दिलचस्पी नहीं होती।

क्योंकि सरकार के जवाब ही मोदीराज की पोल खोलते हैं। जानिए कैसे-

  1. 2017 से अब तक 6 लाख से ज़्यादा लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी। इनमें 1.11 लाख इसी साल के आंकड़े हैं। (गृह मंत्रालय- 30 नवंबर)
  2. बीते 6 साल में भारत में 5 लाख से ज़्यादा कंपनियां बंद हो गईं। ये 6 साल के आंकड़े हैं, यानी 2020 इसमें शामिल नहीं है। (कंपनी मामलों का मंत्रालय- 29 नवंबर)
  3. महाराष्ट्र, दिल्ली, बंगाल और कर्नाटक में सबसे ज़्यादा कंपनियां बंद हुईं।

एक और बात जो जवाब का हिस्सा नहीं है- गुजरात में 28 हज़ार कारोबारी देश छोड़कर भागे हैं। इनमें से अधिकांश बैंकों का लोन (यानी आपका पैसा) हड़पकर भागे हैं।

संसद का चलना, उसमें लंबी बहस, विपक्ष के सवाल और सरकार के जवाब बहुत जरूरी है।

ये सरकार की जवाबदेही तय करती है।

लेकिन मोदी सरकार देश में लोकतंत्र को दफनाने की जल्दी में है। ✍️ Soumitra Roy Sir

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