Aug 6: Day 1 of my fast, day 892 of our chain.
✍️ Soumitra Roy Sir ~ सोशल मीडिया की तमाम मूर्ख प्रजातियां और फिलहाल चरमसुख की तलाश में “सावन के अंधे” ध्यान दें।
ये मैं नहीं, गूगल बाबा कह रहे हैं। भारत की आज़ादी के 75 साल के इतिहास की शानदार झलकियों में मोदी बाबा के कारनामे लगभग गायब हैं।
नोटबंदी, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत, 370, राम मंदिर और अयोध्या, बनारस के मंदिर- कुछ भी नहीं हैं। कोविड वैक्सीन को छोड़कर, जो अपने आप में एक घोटाला है।
चमनबहार मूर्खों को यह समझना चाहिए कि विकास वही है, जो लोगों की ज़िंदगी बदले- न कि उन्हें दौड़ती-हांफती लाशों का अंबार बना दे।
नरेंद्र मोदी को कॉर्पोरेट ने अपने फायदे के लिए 2014 में प्रधानमंत्री बनाया। वे मुख्यमंत्री भी कुर्सी गिराकर ही बने थे।
कॉर्पोरेट का खज़ाना भर रहा उनका गुजरात मॉडल आज दुनिया देख रहा है, जिसने भारत के 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त राशन की लाइन में धकेल रखा है।
15 अगस्त को मोदी लाल किले की प्राचीर से क्या नया फेंकेंगे, यह उत्सुकता रहती है। बीते 3 साल से वे 100 लाख करोड़ का जुमला फेंकते आ रहे हैं।
ज़ाहिर है, वे पानी पी-पीकर कांग्रेस, परिवारवाद, घोटालों को कोसेंगे। गोदी मीडिया और भक्त उनका प्रचार करेंगे और झंडा घोटाले के साथ 75वें साल का जश्न पूरा हो जाएगा।
इसी 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने और हर बेघर को घर देने का मोदी का जुमला पूरा नहीं हो पाया।
कायदे से प्रधानमंत्री को लाल किले से देश के सामने हाथ जोड़कर माफ़ी मांगनी चाहिए।
जी हां, मोदी के 2022 के लिए किये गए इन 37 वादों को पूरा न कर पाने के लिए 37 बार देश से माफ़ी मांगनी चाहिए।
- 2022 तक भारत की जीडीपी विकास दर 9-10 फीसदी होगी।
- निवेश दर 2017-18 में 29 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 36 प्रतिशत हो जाएगी।
- 2022 तक प्रत्येक भारतीय के पास बैंक खाता , जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, पेंशन और ‘सेवानिवृत्ति योजना सेवाएं’ होंगी।
- 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। किस आधार से दोगुना, किस वर्ष, चतुराई से कभी निर्दिष्ट नहीं किया गया। और आय वैसे भी मुद्रास्फीति के साथ बढ़ेगी। आय लाभ नहीं है।
- ” सभी खेतों (हर खेत को पानी) को बेहतर ऑन-फार्म जल-उपयोग दक्षता (प्रति बूंद अधिक फसल) के साथ सिंचाई प्रदान करें।”
- वायु प्रदूषण को कम करने के लिए फसल अवशेषों को नहीं जलाया जाएगा।
- 2022 तक पीएम 2.5 का स्तर 50 से नीचे आ जाएगा।
- हर घर में एलपीजी सिलेंडर होगा।
- 2022 तक, भारतीय रेलवे के सुरक्षा मानक ऐसे होंगे कि ट्रेन दुर्घटना में किसी की भी मृत्यु (“शून्य मृत्यु”) नहीं होगी।
- मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन 2022 तक पूरी हो जाएगी, जो अब दिसंबर 2023 है।
- निर्माण क्षेत्र की विकास दर 2022 तक दोगुनी हो जाएगी, जो 2012-13 से 2017-18 के बीच 7.7 प्रतिशत के आधार पर थी।
- 2022 तक हर भारतीय के पास एक घर होगा।
- 2022 तक प्रत्येक भारतीय के पास शौचालय होगा।
- 2022 तक प्रत्येक भारतीय को 24/7 बिजली की आपूर्ति होगी।
- 2022 तक हर ग्राम पंचायत (हर घर में नहीं) तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंच जाएगा। यह 2018 तक हो जाना चाहिए था ।
- सरकार 2022 तक “सौ प्रतिशत डिजिटल साक्षरता” सुनिश्चित करेगी। दूसरे शब्दों में, प्रत्येक भारतीय को पता होगा कि इंटरनेट का उपयोग कैसे किया जाता है।
- 2022 तक प्रत्येक भारतीय के पास पानी का कनेक्शन होगा। इस समय सीमा को पहले ही 2024 तक बढ़ा दिया गया है।
- 2022 तक भारत कुपोषण मुक्त हो जाएगा।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से सात सौ जिला मुख्यालय अस्पतालों को ” चिकित्सा केंद्र ” (जो भी मतलब हो) में बदल दिया जाएगा।
- स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को प्रशिक्षित करने, प्रौद्योगिकी के उन्नयन और रोगी परिणामों में सुधार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को अपनाने के लिए निजी उद्योग को बनाया जाएगा।
- चिकित्सा पर्यटन (“टेलीमेडिसिन, ई-कंसल्ट, टेलीपैथोलॉजी, टेलीरेडियोलॉजी आदि”) को आकर्षित करने के लिए बीस “मेडिकल फ्री जोन ( एमएफजेड )” बनाए जाएंगे।
- ” 10 नवाचार जिलों की स्थापना करेंगे, जहां उद्यमी और डिजाइनर रहते हैं, काम करते हैं और खेलते हैं” और “डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके कारीगरों को बाजार स्थानों से जोड़ते हैं।”
- हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त किया जाएगा।
- परोपकार के रूप में कौशल प्रदान करने को बढ़ावा दिया जाएगा, और “कौशल 6 वीं कक्षा से अनिवार्य अभ्यास के रूप में कौशल – वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च माध्यमिक के लिए कौशल स्कूल ” शुरू किया जाएगा।
- “भारत के वर्तमान 5.4 प्रतिशत कार्यबल से औपचारिक रूप से कुशल श्रम का अनुपात” बढ़ाकर “कम से कम 15 प्रतिशत” किया जाएगा।
- स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में दो से तीन मिलियन रोजगार, पर्यटन के माध्यम से चार करोड़ रोजगार और खदानों और खनिजों के माध्यम से 50 लाख नए रोजगार सृजित होंगे।
- 2022 तक भारत के पास 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता होगी। वर्तमान क्षमता 80 गीगावॉट है ।
- “2022-23 तक तेल और गैस के आयात में 10 प्रतिशत की कमी करें ।”
- “2018-23 के दौरान 8.5 प्रतिशत की औसत वृद्धि के साथ, 2017-18 में खनन क्षेत्र की वृद्धि को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करना,” नीति आयोग के दस्तावेज़ में कहा गया है।
- “राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) की लंबाई को मौजूदा 1.22 लाख किमी से 2022-23 तक दोगुना करके 2 लाख किमी करना।”
- 2017 तक सभी विलंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, जिनमें से कुछ दशकों से काम कर रही हैं, 2022 तक पूरी हो जाएंगी।
- महिला श्रम बल की भागीदारी दर 2022 तक 30 प्रतिशत होगी।
- भारत का वनावरण वर्तमान 21 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो जाएगा। मोदी सरकार ने अब वन आवरण की परिभाषा को बदल दी है।
- भारत के किसी भी स्कूल में कोई भी छात्र कक्षा 10 पूरा करने से पहले ड्रॉप-आउट नहीं होगा। कोई भी छात्र स्कूल से बाहर नहीं होगा।
- “2022-23 तक डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात कम से कम 1:1400 (डब्ल्यूएचओ मानदंड 1:1000) और नर्स-जनसंख्या अनुपात कम से कम 1:500 (डब्ल्यूएचओ मानदंड 1:400) प्राप्त करें।” वर्तमान में, प्रत्येक 11,082 भारतीयों पर केवल एक एलोपैथिक चिकित्सक है।
- “उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 2016-17 में 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 2022-23 तक 35 प्रतिशत करना।”
- “भारतमाला चरण- I लक्ष्य को 2021-22 तक 24,800 किमी पूरा करके प्राप्त करें, जिसमें 2,000 किमी तटीय और बंदरगाह कनेक्टिविटी सड़कें शामिल हैं।”
ये सिर्फ 37 वादे हैं। लिस्ट लंबी है।
मोदी अगर माफ़ी मांगने लगें तो पूरा भाषण माफ़ीनामा बन जायेगा।
मुझे यकीन है कि मोदी ऐसा नहीं करेंगे। वे नए झूठ, नए जुमले फेंकेंगे।
और फोटू खिंचवाकर निकल लेंगे।
(वीडियो स्क्रिप्ट- करण मुजु)
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Aug 7: Day 2 of my fast, day 893 of our chain.
✍️ Soumitra Roy Sir~
5जी की नीलामी में मोदी सरकार ने 2.8 लाख करोड़ का घोटाला किया और मुर्दा समाज, जनता चुप्पी साधे रही। कोई सवाल नहीं उठा। कोई विरोध नहीं।
अब बिजली वितरण को बेचने का खेल कल से शुरू होगा। एमपी में शिवराज सरकार ने अदाणी को बिजली वितरण का ठेका दिया है।
देखिये, आपके हिस्से में क्या आता है।
फिर सवाल उठेगा- रोटी खाएं या बिजली का बिल भरें?
देश को बिकते हुए बस बेशर्मी से देखते रहिये। गले में धर्म के पट्टे को पकड़े रहिये।
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा था- पानी के सामने खड़े होकर आप नदी नहीं पार सकते।
आप वही कर रहे हैं।
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Aug 8: Day 3 of my fast, day 894 of our chain.
✍️ Girish Malviya
जिस तरह से बिजली के स्मार्ट मीटर लग रहे हैं वैसे ही आने वाले दिनों में जल प्रदाय के भी स्मार्ट मीटर लगने शुरू हो जाएंगे, मोदी सरकार अंदर ही अंदर तेजी से तेजी से जल के निजीकरण पर काम कर रही है
पानी के स्मार्ट मीटर में सेंसर के जरिए मीटरों की रीडिंग आएगी और आने वाले समय में उपभोक्ता रोजाना मोबाइल एप पर ये देख सकेगा कि आज कितना पानी खर्च किया
यह सब होगा स्मार्ट सिटी के नाम पर
जल का निजीकरण दुनिया के बड़े पूंजीपतियों की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है क्योंकि इसे नीले सोने के नाम से जाना जाता है
इक्कीसवीं शताब्दी में साफ पानी सबसे बड़ी कमोडिटी है, वाटर इंडस्ट्री का वार्षिक राजस्व आज आयल सेक्टर के लगभग 40 प्रतिशत से ऊपर जा पहुँचा है। फ़ॉरच्यून पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार बीसवीं शताब्दी के लिए तेल की जो कीमत थी इक्कीसवीं शताब्दी के लिए पानी की वही कीमत होगी।
सरकारे अब इससे भी मुनाफा कमाना चाहती है वे चाहती हैं कि पानी का निजीकरण हो ही जाए ताकि मुनाफे का एक हिस्सा सरकारों तक भी पहुंचता रहे इसकी शुरुआत PPP प्रोजेक्ट के जरिए जल वितरण की व्यवस्था में निजी कम्पनियो की भागीदारी सुनिश्चित कर के की जा चुकी है
इस तरह से पानी के निजीकरण करने के क्या खतरे है ?…. यह दक्षिणी अमेरिकी देश बोलिविया से स्पष्ट हो चुका है, साल 1999 में, जब विश्व बैंक के सुझाव पर बोलिविया सरकार ने कानून पारित कर कोचाबांबा की जल प्रणाली का निजीकरण कर दिया.उन्होंने पूरी जल प्रणाली को ‘एगुअस देल तुनारी’ नाम की एक कंपनी को बेच दिया, जोकि स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों का एक संघ था.कानूनी तौर पर अब कोचाबांबा की ओर आने वाले पानी और यहां तक कि वहां होने वाली बारिश के पानी पर भी ‘एगुअस देल तुनारी’ कंपनी का हक था.निजीकरण के कुछ समय बाद कंपनी ने घरेलू पानी के बिलों में भारी बढ़ोतरी कर दी. कोचाबांबा में उनका पहला काम था 300 प्रतिशत जल दरें बढ़ाना। इससे लोग सड़कों पर आ गए।
कोचाबांबा में पानी के निजीकरण विरोधी संघर्ष शुरू हुआ था जो सात से अधिक सालों तक लगातार चला, जिसमें तीन जानें गईं और सैकड़ों महिला-पुरुष जख़्मी हुए। …..जिस निजी कम्पनी को जल पर नियंत्रण रखने का ठेका दिया गया उसका एकमात्र उद्देश्य था- मुनाफा कमाना।……..उन्होंने कोई निवेश नहीं किया। वे देश के बुनियादी संसाधनों का उपयोग कर सिर्फ मुनाफा ही कमाना चाहते थे।
बोलिविया के अनुभव से सीख लेते हुए जलक्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप से हमे बचना चाहिए…… लेकिन ऐसा होता हमे दिख नही रहा है, बिजली तो पूरी तरह से निजी हाथों में जा ही चुकी है अब पेयजल व्यवस्था पर भी निजी क्षेत्र का कब्जा होने जा रहा है
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