June 7: Day 1 of my fast day 832 of our chain.
बीजेपी ने भले पार्टी के 38 नेताओं की ‘हेट स्पीच लिस्ट’ बनाई है और उनमें से 27 नेताओं को संयम बरतने की घुड़की दी हो।
लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हेट स्पीच के मामले में कितने सतर्क हैं और उन्होंने किन मौकों पर नफरती और बेबुनियाद बयान दिए हैं, यह जानने के लिए आज मैंने अपना ड्रोन उड़ा दिया।
बीजेपी की हिम्मत नहीं है कि वे प्रधानमंत्री पर उंगली उठाकर उन्हें भी संयम बरतने को कह सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सीएम रहते हुए कई बार हेट स्पीच वाले बयान दिए। 2002 के गुजरात दंगों के बाद उन्होंने मुस्लिम विस्थापितों के कैंप को ‘बच्चे पैदा करने का केंद्र’ कहा था। उसी बयान में ‘हम पांच, हमारे पच्चीस’ भी एक हिस्सा था।
मोदी का वह बयान भी चर्चित है , जिसमें यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें 2002 में गुजरात हिंसा पर दुख है, मोदी ने जवाब दिया था- यहां तक कि एक कुत्ता भी गाड़ी के नीचे आ जाए तो दुख होता है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी ने कहा था कि ‘अगर एक खास समुदाय के लिए आरक्षण के कोटे को कम किया जाता है तो मैं अपनी जान दे दूंगा’।
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी के टिकट पर राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने पर उन्होंने कहा था- ‘वे वहां से चुनाव इसलिए लड़ रहे हैं, क्योंकि हिंदू अल्पसंख्यक हैं।’ प्रधानमंत्री का दावा बेबुनियाद था, क्योंकि वायनाड सीट पर 50% हिंदू मतदाता हैं।
अब दुनिया के दो अरब मुसलमानों के गुस्से के आगे नतमस्तक 56 इंची पीएम और उनकी पार्टी देश में 20 करोड़ मुसलमानों के सम्मान, गरिमा और उनके मजहब को कितना सम्मान देगी, यह देखने वाली बात है।
✍️ Soumitra Roy Sir
#ChainFastingForPeace
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June 8:
Day 2 of my fast, day 833 of our chain.
Congratulations Narendra Modi for this achievement…only you can do this…..
India has finished at the bottom of the Environment Performance Index-2022 released by the World Bank. This means India is among those countries in the world that have the worst environmental health. Out of 180 countries that have been ranked, India is in the bottom five with a score of 18.9. Even Bangladesh, Myanmar, Pakistan, and Vietnam have ranked better than India 😔
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June 9: Day 3 of my fast day 834 of our chain
मैं आजतक में काम करता था। वहां काम ऐसा था कि चारों तरफ टीवी चलता रहता था। यहां तक कि हमारे सामने टेबल पर भी एक स्क्रीन रखी रहती थी। एक दिन शाम को सामने वाली स्क्रीन पर हमारा ही चैनल लगा था और आवाज जरा सा तेज थी। डिबेट का कार्यक्रम चल रहा था। उस कार्यक्रम में पंडित और मौलाना नुमा एक अदद जोड़ी बहुत तगड़ा लड़ गई। मैंने थोड़ी देर सुना, मन खराब होने लगा तो म्यूट कर दिया।
अपना काम निपटाया और सोचा थोड़ा बाहर घूमकर आता हूं। बाहर आकर देखा कि दोनों डिबेट से उठकर आ गए हैं। बाहर खड़े बतिया रहे हैं और ठहाके लगा रहे हैं। देखकर लगा, बहुत याराना लगता है! तब तक चैनल की गाड़ी आकर रुकी, दोनों एक साथ उसमें सवार हुए और चले गए।
इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है? यही कि चैनल पर लड़ने वाले पंडित, साधु, आलिम और मौलाना सब नफरत के कारोबारी हैं। उन्हें इसके लिए चैनल से मोटा पैसा मिलता है। वे आपस में वाकई वैसे होते जैसा चैनल पर दिखते हैं तो स्टूडियो के अंदर पटकी पटका करते। वे ऐसा नहीं करते। उनका काम है धार्मिक विभाजन की बातें करके आपको उकसाना और बांटना।
अगर आपको उन्हें सुनने की आदत पड़ गई है, या सुनना अच्छा लगता है, रोज सुनते हैं और गंभीरता से लेते भी हैं तो अपने परिवार और दोस्तों से बात करें। उनकी मदद लें, किसी अच्छे मनोचिकित्सक के पास जाएं। आपके दिमाग में टीवी जहर फैल गया है और अंदर अंदर केमिकल लोचा चल रहा है। ✍️ Krishna Kant Sir
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