Feb 4: Day 1of my fast, day 711 of our chain.
“People write because no one listens.”
कितनी गहरी और सच्ची बात लिखी है, “लोग लिखते हैं, क्योंकि कोई सुनता नहीं” ।
मैं भी बरसों पहले नहीं लिखता था, क्योंकि तब मुझे किसी से कुछ कहना नहीं होता था। लेकिन जब कहने की कोशिश की तो सुनने वाले नहीं मिले। जो थोड़े बहुत मिले भी, तो वे भी टाइमपास टाइप के लोग ही मिले, जिन्हें मेरे कहे से कोई मतलब नहीं होता, केवल टाइम पास करने चले आते थे।
फिर जब समझ में आ गया कि मैं जो कुछ कहता हूँ, वह परलौकिक है अर्थात इस दुनिया के लोगों के मतलब की बातें नहीं हैं, तो फिर कहना बंद कर दिया और लिखना शुरू कर दिया।
अब आप पूछेंगे कि आप कौन सी परलौकिक बातें करते हैं ?
तो मैं जो कुछ भी लिखता हूँ वह परलौकिक ही है। जैसे कि देश लूटने और लुटवाने वालों के विरुद्ध आवाज उठाओ। और देश की जनता तो भक्त है देश को लूटने और लुटवाने वालों की। इसलिए लोग पारलौकिक बकवास सुनकर कन्नी काट जाते हैं।
जैसे कि मैं कहता हूँ कि सभी सरकारें और राजनैतिक पार्टियां गिरोह होती हैं अपराधियों और माफियाओं की, जिनका उद्देश देश की जनता का कल्याण करना नहीं, बल्कि फ्री की चीजें देकर देश व जनता को लूटना और लुटवाना होता है।
और यह भी देश की जनता के लिए परलौकिक बाते ही हैं, क्योंकि देश की जनता तो लुटेरों, माफियाओं की भक्ति के नशे में धुत्त रहती है।
ऐसी बहुत सी बातें मैं कहता हूँ, जो देश की जनता के समझ के परे होती है और केवल पारलौकिक जगत के लोग ही समझ सकते हैं।
कभी-कभी तो यही लगता है कि मैं ही गलत जगह पर आ गया हूँ, मुझे तो परलौकिक जगत में होना चाहिए था। जहां देश व देश की जनता को लूटने और लुटवाने वालों को देश द्रोही माना जाता है।
~ Vishuddha Reborn
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